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कबीर धूलि सकेलि करि, पुड़ी ज बाँधी एह

साखी · लगभग २ मिनट
कबीर धूलि सकेलि करि, पुड़ी ज बाँधी एह।दिवस चारि का पेषणां अन्ति षहे की षहे॥२०॥

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