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परम गुर देखो रिदै बिचारी

पद · लगभग २ मिनट
परम गुर देखो रिदै बिचारी,कछू करौ सहाई हमारी॥ टेक॥लावानालि तंति एक सँमि करि जंत्रा एक भल साज।सति असति कछु नाहीं जानूँ, जैसे बजवा तैसैं बाजा॥चोर तुम्हारा तुम्हारी आग्या, मुसियत नगर तुम्हारा।इनके गुनह हमह का पकरौ, का अपराध हमारा॥सेई तुम्ह सेई हम एकै कहियत, जब आपा पर नाहीं जाँनाँ।ज्यूँ जल मैं जल पैसि न निकसै, कहै कबीर मन माँनाँ॥292॥

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