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मधुकर! यहाँ नहीं मन मेरो

पद · लगभग २ मिनट

राग सोरठ

मधुकर! यहाँ नहीं मन मेरो।गयो जो सँग नंदनंदन के बहुरि न कीन्हो फेरो॥लयो नयन मुसकानि मोल है, कियो परायो चेरो।सौंप्यो जाहि भयो बस ताके, बिसर्‌यो बास-बसेरो॥को समुझाय कहै सूर जो रसवस काहू केरो?मँदे पर्‌यो, सिधारू अनत लै, यह निर्गुन मत तेरो॥२४८॥

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