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ऊधो! कत वे बातें चाली?

पद · लगभग २ मिनट
ऊधो! कत वे बातें चाली?अति मीठी मधुरी हरि-मुख की हैं उर-अंतर साली॥स्याम सघन तन सींची बेली, हस्त कमल धरि पाली।अब ये बेली सूखन लागीं, छाँड़ि दई हरि-माली॥तब तो कृपा करत ब्रज ऊपर संग लता ब्रजबाली।सूर स्याम बिन मरि न गई क्यों बिरहबिथा की घाली?॥२०४॥

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