सुन्दर पर्बत उड़ि गये, रुई रहो थिर होइ।बाव बज्यौ इंहिं भांति कौ, क्यौं करि मांनै कोइ॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
झूठौ धन झूठौ धाम झूठौ कुल झूठौ कामसुंदरदासकविताझूठौ धन झूठौ धाम झूठौ कुल झूठौ कामसुंदरदास२ मिनट का पाठ