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रजसि मीन देखी बहु पानी, काल जाल की खबरि न जानी

पद · लगभग २ मिनट
रजसि मीन देखी बहु पानी, काल जाल की खबरि न जानी॥ टेक॥गारै गरबनौ औघट घाट, सो जल छाड़ि बिकानौं हाट॥बँध्यो न जानैं जल उदमादि, कहै कबीर सब मोहे स्वादि॥86॥

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