दुष दै को न रुसाइये, कहत जान सुन मित्तजान कविकवितादुष दै को न रुसाइये, कहत जान सुन मित्तजान कवि२ मिनट का पाठ
जानि लेहू कवि जान कहि, सो राजत संपूरजान कविकविताजानि लेहू कवि जान कहि, सो राजत संपूरजान कवि२ मिनट का पाठ
ठौर ठौर मनरथ फिरत, कोऊ छूट्यो नाहिंजान कविकविताठौर ठौर मनरथ फिरत, कोऊ छूट्यो नाहिंजान कवि२ मिनट का पाठ