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हाशिया
कविता
होत कृपा जो बड़ेन की, सो कदाचि घटि जाइ
रहीम
दोहा · लगभग २ मिनट
होत कृपा जो बड़ेन की, सो कदाचि घटि जाइ।
तो रहीम मरिबो भलो, जाते दुख हटि जाइ॥२५३॥
॥
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होइ न जाकी छाँह ढिग, फल रहीम अति दूर
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रहिमन पुतरी स्याम, मनौ जलज मधुकर लसै
रहीम
कविता
रहिमन पुतरी स्याम, मनौ जलज मधुकर लसै
रहीम
२ मिनट का पाठ
इक नाहीं इक पीर, हिय रहीम होती रहै
रहीम
कविता
इक नाहीं इक पीर, हिय रहीम होती रहै
रहीम
२ मिनट का पाठ
रहिमन कीन्ही प्रीत, साहब को भावै नहीं
रहीम
कविता
रहिमन कीन्ही प्रीत, साहब को भावै नहीं
रहीम
२ मिनट का पाठ