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हाशिया
कविता
लैकै सुघर पुरुषवा, पिअ के साथ
रहीम
बरवै · लगभग २ मिनट
पति
लैकै सुघर पुरुषवा, पिअ के साथ।
छपरो एक छतरिआ, बरखत पाथ॥१०५॥
॥
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अ+
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लै हीरन कै हरवा, मोतिन माल
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सखि इत हरबर आवत, भो पथ खेद
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ओछे को सतसंग, रहिमन तजहु अँगार ज्यों
रहीम
कविता
ओछे को सतसंग, रहिमन तजहु अँगार ज्यों
रहीम
२ मिनट का पाठ
सीस नवाइ नबेलिया, निचवा जोइ
रहीम
कविता
सीस नवाइ नबेलिया, निचवा जोइ
रहीम
२ मिनट का पाठ
सुन्दर चतुर धनिकवा, कुल को ऊँच
रहीम
कविता
सुन्दर चतुर धनिकवा, कुल को ऊँच
रहीम
२ मिनट का पाठ