कान्ह भए बस बाँसुरी के अब कौन सखी हमकों चहिहै।निस द्यौस रहै सँग साथ लगी यह सौतिन तापन क्यों सहिहै॥जिन मोहि लियो मनमोहन को रसखानि सदा हमकों दहिहै।मिलि आओ सबै सखी भाग चलैं अब तो ब्रज मैं बँसुरी रहिहै॥

कान्ह भए बस बाँसुरी के
रसखानसवैया · लगभग २ मिनट