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मोरपखा सिर ऊपर राखिहौं

सवैया · लगभग २ मिनट
मोरपखा सिर ऊपर राखिहौं गुंज की माल गरें पहिरौंगी।ओढ़ि पितंबर लै लकुटी बन गोधन ग्वारनि संग फिरौंगी॥भावतो वोहि मेरो रसखानि सों तेरे कहे सब स्वाँग करौंगी।या मुरली मुरलीधर की अधरान धरी अधरा न धरौंगी॥

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