बंसी बजावत आनि कढ़ो सो गली में अली कछू टोना सों डारैं।हेरि चितै तिरछी करि दृष्टि चलो गयो मोहन मूठि सी मारैं॥ताही घरी सों परी धरी सेज पै प्यारी न बोलति प्रानहूँ वारैं।राधिका जीहै तौ जीहैं सबै न तौ पीहैं हलाहल नंद के द्वारैं॥

बंसी बजावत आनि कढ़ो
रसखानसवैया · लगभग २ मिनट