जाउँ कहाँ, ठौर है कहाँ देव! दुखित-दीनको ?को कृपालु स्वामी-सारिखो, राखे सरनागत सब अँग बल-बिहीनको ॥ १ ॥गनिहि, गुनिहि साहिब लहै, सेवा समीचीनको।अधम----- अगुन आलसिनको पालिबो फबि आयो रघुनायक नवीनको ॥ २ ॥अधनमुखकै कहा कहौं, बिदित है जीकी प्रभु प्रबीनको।तिहू काल, तिहु लोकमें एक टेक रावरी तुलसीसे मन मलीनको ॥ ३ ॥

जाउँ कहाँ, ठौर है कहाँ देव! दुखित-दीनको ?
तुलसीदासपद · लगभग २ मिनट