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दो जग तौ हम ॲगिया,यहु डर नाहीं मुझ

साखी · लगभग २ मिनट
दो जग तौ हम ॲगिया, यहु डर नाहीं मुझ।भिस्त न मेरे चाहिए, बांँझ पियारे तुझ॥७॥

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