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हाशिया
कविता
दौ लागी सायर जल्या, पंपो बैठे आइ
कबीर
साखी · लगभग २ मिनट
दौ लागी सायर जल्या, पंपो बैठे आइ ।
दाधी देह न पालवैं, सतगुर गया लगाय ॥६॥
॥
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दो जग तौ हम ॲगिया,यहु डर नाहीं मुझ
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धरती गगन पवन नहीं होता, नहीं तोया, नहीं तारा
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सुत अवराध करल है जेते
कबीर
कविता
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कबीर
कविता
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कबीर
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हीरै हीरा बेधि पवन मन सहजे रह्या समाई
कबीर
कविता
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कबीर
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