खोय दई बुधि सोय गई सुधि रोय हँसे उनमाद जग्यौ है।मौन गहै चकि चाकि रहै चलि बात कहै तन दाह दग्यौ है॥जानि परै नहिं जान तुम्हैं लखि ताकि कहा कछु आहि खग्यौ है।सौचनि ही पचियै घनआनंद हेत पग्यौ किधौं प्रेत लग्यौ है॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
जासों प्रीति ताहि निठुराई सौं निपट नेहघनानंदकविताजासों प्रीति ताहि निठुराई सौं निपट नेहघनानंद२ मिनट का पाठ