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हाशिया
कविता
काम कछू आवै नहीं, मोल रहीम न लेइ
रहीम
दोहा · लगभग २ मिनट
काम कछू आवै नहीं, मोल रहीम न लेइ।
बाजू टूटे बाज को, साहब चारा देह॥३३॥
॥
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काज परे कछु और है, काज सरे कछु और
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काह करब बैकुंठ लै, कलपबृच्छ की छाँह
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सघन कुँज अमरैआ, सीतल छाँहि
रहीम
कविता
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रहीम
२ मिनट का पाठ
सीस नवाइ नबेलिया, निचवा जोइ
रहीम
कविता
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रहीम
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रहीम
कविता
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रहीम
२ मिनट का पाठ