करता था तौ क्यूॅ रहया, अब करि क्यूॅ पछताय।बोवै पेड़ बबूल का, अंब कहाँ ते खाय॥२७॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
स्वर्ग वास न बाछियै डारियै न नरक निवासुकबीरकवितास्वर्ग वास न बाछियै डारियै न नरक निवासुकबीर२ मिनट का पाठ