साहेब कौन कमी घर तेरा।भूखे अन्न पियासे पानी, कपड़ा से तन घेरो।जो कुछ न्यामत सवै महल में, लरच खजाना ढेरो॥ख़ाक से पाक कियो पल माहीं, है समरथ तेरो।भव से काढ़ि कियो तरनी पर, खेइ लगावो सबेरो॥रहै न घाम छाँह दुनिया में, रहे न जम की चेरो।राव रंक रंक से राजा, छिन में बाजत तूरो॥मानो सत्त झूठ जनि जानो, सत्त बचन है पूरो।धरमदास चरनन पर बिनवै, तुम गति सब भरे पूरो॥

साहेब कौन कमी घर तेरा
धनी धरमदासपद · लगभग २ मिनट