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साहेब सतगुरु घर आया हो

पद · लगभग २ मिनट
साहेब सतगुरु घर आया हो।अँगना मोर जगमग भया, सुर संपति लाया हो॥आधि गई मेरी हे सखी, आज सज्जन पाया हो।धन विधाता लेख लिखा, निज भाग जगाया हो॥कोमल बचन अंग दया घनेरी, कल्प वृच्छ की छाया हो।धन जननी अस संत जिन जाया, अनंद बधाया हो॥जप तप नेम धर्म बहु कीन्हा, रसना नामहिं गाया हो।धरमदास सतगुर सतसंग से, छिन में पर यह पाया हो॥

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