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हाशिया
कविता
बड़ माया को दोष यह, जो कबहूँ घटि जाइ
रहीम
दोहा · लगभग २ मिनट
बड़ माया को दोष यह, जो कबहूँ घटि जाइ।
तौ रहीम मरिबो भलो, दुख सहि जियै बलाइ॥११३॥
॥
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पूरुष पूजैं द्यौहरा, तिय पूजैं रघुनाथ
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बड़े दीन को दुख सुने, लेत दया उर आनि
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सब मिलि करैं निहोरवा, हम कहँ देइ
रहीम
कविता
सब मिलि करैं निहोरवा, हम कहँ देइ
रहीम
२ मिनट का पाठ
सघन कुँज अमरैआ, सीतल छाँहि
रहीम
कविता
सघन कुँज अमरैआ, सीतल छाँहि
रहीम
२ मिनट का पाठ
सेत कुसुम के हरवा, भूषन सेत
रहीम
कविता
सेत कुसुम के हरवा, भूषन सेत
रहीम
२ मिनट का पाठ