एक अनेक सदा है समान है थूल है सूछम ग्रंथ बतावै।अबिनासी है नित्य प्रगट्ट छिप्यौ निरबंध निसीम है कैसै बंधावै।आदि अनादि है कारन काज निसंधि की संधि कौं को है जु पावै।आप अनंत अखंड अपार सु ऐसौ सरीर मैं कैसैं कै आवै॥

एक अनेक सदा है समान है थूल है
जसवंत सिंहसवैया · लगभग २ मिनट