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प्रीतम नहिं कछु लखि सक्यो, आलि कही तिय कान

दोहा · लगभग २ मिनट
प्रीतम नहिं कछु लखि सक्यो, आलि कही तिय कान।नथ उतारि धरि नाक तं, कह जमाल का जान॥

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