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हाशिया
कविता
कबीर भाठी कलाल की, बहुतक बैठे आइ
कबीर
साखी · लगभग २ मिनट
कबीर भाठी कलाल की, बहुतक बैठे आइ।
सिर सौपै सोई पिवै, नहीं तो पिया न जाइ॥३॥
॥
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कबीर बादल प्रेम का, हम परि बरष्या आइ
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कबीर मन गाफिल भया, सुमरिण लागै नाहिं
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सुख माँगत दुख आगै आवै
कबीर
कविता
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कबीर
२ मिनट का पाठ
सरीर सरोवर भीतरै आछै कमल अनूप
कबीर
कविता
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कबीर
२ मिनट का पाठ
सुत अवराध करल है जेते
कबीर
कविता
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कबीर
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