कबहुँ समय सुधि द्ययाबी, मेरी मातु जानकी।जन कहाइ नाम लेत हौं, किये पन चातक ज्यों, प्यास-प्रेम-पानकी ॥ १ ॥सरल कहाई प्रकृति आपु जानिए करुना-निधानकी।निजगुन, अरिकृत अनहितौ, दास-दोष सुरति चित रहत न दिये दानकी ॥बानि बिसारनसील है मानद अमानकी।तुलसीदास न बिसारिये, मन करम बचन जाके, सपनेहुँ गति न आनकी ॥

कबहुँ समय सुधि द्ययाबी, मेरी मातु जानकी
तुलसीदासपद · लगभग २ मिनट