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रैनि गई मति दिन भी जाइ, भवर उड़े बन बैठे आइ

पद · लगभग २ मिनट
रैनि गई मति दिन भी जाइ,भवर उड़े बन बैठे आइ॥ टेक॥कांचै करवै रहै न पानी, हंस उड़ा काया कुमिलांनी।थरहर थरहर कंपै जीव, नां जांनूं का करिहै पीव।कऊवा उड़ावत मेरी बहिंयां पिरांनी, कहै कबीर मेरी कथा सिरांनी।॥360॥

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