आऊँगा न जाऊँगा, न मरूँगा न जीऊँगा।गुर के सबद मैं रमि रमि रहूँगा॥ टेक॥आप कटोरा आपै थारी, आपै पुरिखा आपै नारी।आप सदाफल आपै नींबू, आपै मुसलमान आपै हिंदू॥आपै मछकछ आपै जाल, आपै झींवर आपै काल।कहै कबीर हम नांही रे नांही, नां हम जीवत न मूवले मांही॥331॥

आऊँगा न जाऊँगा, न मरूँगा न जीऊँगा
कबीरपद · लगभग २ मिनट