मेरी सूचीपढ़ना शुरू करें

केसव! कहि न जाइ का कहिये

पद · लगभग २ मिनट
केसव! कहि न जाइ का कहिये।देखत तव रचना बिचित्र हरि! समुझि मनहिं मन रहिये ॥ १ ॥सून्य भीति पर चित्र, रंग नहिं, तनु बिनु लिखा चितेरे।धोये मिटइ न मरइ भीति, दुख पाइय एहि तनु हेरे ॥ २ ॥रबिकर-नीर बसै अति दारुन मकर रूप तेहि माहीं।बदन-हीन सो ग्रसै चराचर, पान करन जे जाहीं ॥ ३ ॥कोउ कह सत्य, झूठ कह कोऊ, जुगल प्रबल कोउ मानै।तुलसिदास परिहरै तीन भ्रम, सो आपन पहिचानै ॥ ४ ॥

अब कुछ और पढ़ें