जिह कुल पूत न ज्ञान बिचारी। बिधवा कस न भई महतारी॥जिह नर राम भगति नहीं साधी। जनमत कस न मुयो अपराधी॥मुच मुच गर्भ गये कौन बचिया। बुड़भुज रूप जीवे जग मझिया॥कहु कबीर जैसे सुंदर स्वरूप। नाम बिना जैसे कुबज कुरूप॥85॥

जिह कुल पूत न ज्ञान बिचारी
कबीरपद · लगभग २ मिनट