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सुन्दर तृष्णा करत है, सबकौ बांद गुलाम

दोहा · लगभग २ मिनट
सुन्दर तृष्णा करत है, सबकौ बांद गुलाम।हुकम कहै त्यौं ही चलै, गनै शीत नहिं घांम॥

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