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निज बल कौं परिमान तुम, तारै पतित बिसाल

दोहा · लगभग २ मिनट
निज बल कौं परिमान तुम, तारै पतित बिसाल।कहा भयौ जु न हौं तरतु, तुम खिस्याहु गोपाल॥

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