माटी को पुतरा कैसे नचतु है।देखै देखै सुनै बोलै दऊरिउं फिरतु है।जब कछु पावै गरब करतु है, माइआ गई तब रोवनु लगतु है॥मन बच क्रम रस कसहिं लुभाना, विनसि गइआ जाइ कहूँ समाना॥कहि रैदास बाजी जगु माई, बाजीगर सऊं मोहिं प्रीति बनिआहिं॥

माटी को पुतरा कैसे नचतु है
रैदाससबद · लगभग २ मिनट