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हाशिया
कविता
रैदास स्रम करि खाइहिं, जौं लौं पार बसाय
रैदास
दोहा · लगभग २ मिनट
रैदास स्रम करि खाइहिं, जौं लौं पार बसाय।
नेक कमाई जउ करइ, कबहुं न निहफल जाय॥
॥
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जिह्वा सों ओंकार जप, हत्थन सों कर कार
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रैदास हमारो साइयां, राघव राम रहीम
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रैदास
कविता
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रैदास
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रैदास
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रैदास
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रैदास
कविता
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रैदास
२ मिनट का पाठ