दामिनि चमकै चहुं दिसा, बून्द लगत है बांन।सुन्दर ब्याकुल बिरहनी, रहै क निकसै प्रांन॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
बोलिये तौ तब जब बोलिवे की सुधि होइसुंदरदासकविताबोलिये तौ तब जब बोलिवे की सुधि होइसुंदरदास२ मिनट का पाठ