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हाशिया
कविता
सज्जन एहा चाहिये, जेहा तरवर ताल
जमाल
दोहा · लगभग २ मिनट
सज्जन एहा चाहिये, जेहा तरवर ताल।
फल भच्छत पानी पियत, नाहि न करत जमाल॥
॥
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अ−
अ+
पिछला
पूरी माँगति प्रेम सो, तजी कचौरी प्रीत
अगला
जमला ऐसी प्रीत कर, जैसी हिंदू जोय
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राज हँस परसंस पुनि, मोती चुगवति बाल
जमाल
कविता
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जमाल
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गजरा गूँध गुलाब के, मालिन ही दिय पानि
जमाल
कविता
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जमाल
२ मिनट का पाठ
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जमाल
कविता
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जमाल
२ मिनट का पाठ