राम मिलन क्यों पइये, मोहिं राखा ठगवन घेरि हो।क्रोध तो काला नाग है, काम तो मरघट काल।आप आप को खैंचते, मोहिं कर डाला बेहाल हो॥एक कनक और कामिनी, यह दोनों बटपार।मिसरी की छुरी गर लाय के, इन मारा सब संसार हो॥इनमें कोई ना भेला, सब का एक विचार।पैड़ा मारैं भजन का, कोइ कैसे कै उतरे पार हो॥उपजत बिनसत थकि पड़ा, जियरा गया उकताय।कहैं मलूक बहु भरमिया, मो पर अब नहिं भरमो जाय हो॥

राम मिलन क्यों पइये
मलूकदासपद · लगभग २ मिनट