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जयति राज-राजेंद्र राजीवलोचन, राम

पद · लगभग २ मिनट
जयतिराज-राजेंद्र राजीवलोचन, रामनाम कलि-कामतरु, साम-शाली।अनय-अंभोधि-कुंभज, निशाचर-निकर-तिमिर-घनघोर-खरकिरणमाली ॥ १ ॥जयति मुनि-देव-नरदेव दसरत्थके ,देव-मुनि-वंद्य किय अवध-वासी।लोक नायक-कोक-शोक-संकट-शमन,भानुकुल-कमल कानन-विकासी ॥ २ ॥जयति शृंगार-सर तामरस-दामदुति-देह, गुणगेह, विश्वोपकारी ॥ ।३ ॥सकल सौभाग्य-सौंदर्य-सुषमारुप,मनोभव कोटि गर्वापहारी ॥ ३ ॥(जयति) सुभग सारंग सुनिखंग सायक शक्ति,चारु चर्मासि वर वर्मधारी।धर्मधुरधीर, रघुवीर, भुजबल अतुल, ।हेलया दलित भूभार भारी ॥ ४ ॥जयति कलधौत मणि-मुकुट, कुंडल, तिलक-झलक भलि भाल, विधु-वदन-शोभा।दिव्य भूषन, बसन पीत, उपवीत,किय ध्यान कल्यान-भाजन न को भा ॥ ५ ॥(जयति) भरत-सौमित्रि-शत्रुघ्न-सेवित, सुमुख,सचिव-सेवक-सुखद, सर्वदाता ॥अधम, आरत, दीन, पतित, पातक-पीनसकृत नतमात्र कहि ‘पाहि’ पाता ॥ ६ ॥जयति जय भुवन दसचारि जस जगमगत,पुन्यमय, धन्य जय रामराजा।चरित-सुरसरित कवि-मुख्य गिरि निःसरित,पिबत, मज्जत मुदित सँत-समाजा ॥ ७ ॥जयति वर्णाश्रमाचारपर नारि-नर,सत्य-शम-दम-दया-दानशीला।विगत दुख-दोष, संतोस सुख सर्वदा,सुनत, गावत राम राजलीला ॥ ८ ॥जयति वैराग्य-विज्ञान-वारांनिधेनमत नर्मद, पाप-ताप-हर्ता।दास तुलसी चरण शरण संशय-हरण,देहि अवलंब वैदेहि-भर्ता ॥ ९ ॥

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