चूल्हा भाठी भार महिं, इंधन सब जरि जाइ।त्यौं सुन्दर प्रभु पेट यह, कबहूँ नहीं अघाइ॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
बैरी घर मांहि तेरे जानत सनेही मेरेसुंदरदासकविताबैरी घर मांहि तेरे जानत सनेही मेरेसुंदरदास२ मिनट का पाठ