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हाशिया
कविता
सुन्दर कोऊ साधु की, निंदा करै सु नीच
सुंदरदास
दोहा · लगभग २ मिनट
सुन्दर कोऊ साधु की, निंदा करै सु नीच।
चल्यौ अधोगति जाइ है, परै नरक कै बीच॥
॥
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दैव बिछोह करै जबहिं, तब कोई बस नांहिं
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सुन्दर कछु संख्या नहीं, बहुतक धरे शरीर
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