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ऊधो! तुम सब साथी भोरे

पद · लगभग २ मिनट

राग मलार

ऊधो! तुम सब साथी भोरे।मेरे कहे बिलग मानौगे, कोटि कुटिल लै जोरे॥वै अक्रूर क्रूर कृत तिनके, रीते भरे, भरे गहि ढोरे।वै घनस्याम, स्याम अंतरमन, स्याम काम महँ बोरे॥ये मधुकर दुति निर्गुन गुनते, देखे फटकि पछोरे।सूरदास कारन संगति के कहा पूजियत गोरे?॥२११॥

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