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सुंदर तृष्णा कोढनी, कोढी लोभ भ्रतार

दोहा · लगभग २ मिनट
सुंदर तृष्णा कोढनी, कोढी लोभ भ्रतार।इनकौं कबहुं न भीटिये, कोढ लगै तन ख्वार॥

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