रहे चकि लाल चितौ मुख बाल पर्यो तन रूप तरंगनि माहीं।भाइ सुभाइ उठे छिनही छिन लालची नैनन क्यों हूँ अघाहीं॥यौवन रंग भरे अंग-अंग बिलास अनंत कहे नहिं जाहीं।बानिक आहि अनूप छबीली की पानिप की उपमा ध्रुव नाहीं॥

रहे चकि लाल चितौ मुख बाल
ध्रुवदाससवैया · लगभग २ मिनट