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रहे चकि लाल चितौ मुख बाल

सवैया · लगभग २ मिनट
रहे चकि लाल चितौ मुख बाल पर्यो तन रूप तरंगनि माहीं।भाइ सुभाइ उठे छिनही छिन लालची नैनन क्यों हूँ अघाहीं॥यौवन रंग भरे अंग-अंग बिलास अनंत कहे नहिं जाहीं।बानिक आहि अनूप छबीली की पानिप की उपमा ध्रुव नाहीं॥

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