भीजी नवेली चँवेली फुलेल सों फूलनि के पट भूषन सोहै।लोइन बंक बिशाल सचिक्कन अंजनि की छबि प्रानन मोहै॥रूप तरगंनि पानिप अंगनि प्यारी सखी ललितादिक जोहै।भूलि रही ध्रुव तौ छवि श्री अरु मोहनी मैन की नारि धौं कोहै?

भीजी नवेली चँवेली फुलेल सों
ध्रुवदाससवैया · लगभग २ मिनट