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अव्वल अल्लह नूर उपाया कुदरत के सब बंदे

पद · लगभग २ मिनट
अव्वल अल्लह नूर उपाया कुदरत के सब बंदे॥एक नूर के सब जन उपज्या कौन भले को मंदे॥लोगा भरमि न भूलहु भाई।खालिकु खलक खलक महि खालिकु पूर रह्यो सब ठाई।माटी एक अनेक भाँति करि साजी साजनहारे॥ना कछु पोच माटी के मांणे, ना कछु पोच कुंभारे॥सब महि सच्च एको सोई तिसका किया सब किछु होई॥हुकम पछानै सु एको जानै बंदा कहियै सोई॥अल्लह अलख न जाई लखिया गुरु गुड़ दीना मीठा॥कहि कबीर मेरी संका नासी सर्व निरंजन डीठा॥12॥

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