जो ख़ुदा पच्छिम बसै तौ पूरब बसत है राम।रैदास सेवों जिह ठाकुर कूं, तिह का ठांव न नाम॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
मुकुर मांह परछांइ ज्यौं, पुहुप मधे ज्यों बासरैदासकवितामुकुर मांह परछांइ ज्यौं, पुहुप मधे ज्यों बासरैदास२ मिनट का पाठ