मेरी सूचीपढ़ना शुरू करें

जो अनुराग न राम सनेही सों

पद · लगभग २ मिनट
जो अनुराग न राम सनेही सों।तौ लह्यो लाहु कहा नर-देही सों ॥ १ ॥जो तनु धरि, परिहरि सब सुख, भये सुमति राम-अनुरागी।सो तनु पाइ अघाइ किये अघ, अवगुन-उदधि अभागी ॥ २ ॥ग्यान-बिराग, जोग-जप, तप-मख, जग मुद-मग नहिं थोरे।राम-प्रेम बिनु नेम जाय जैसे मृग-जल-जलधि-हिलोरे ॥ ३ ॥लोक-बिलोकि, पुरान-बेदि सुनि, समुझि-बूझि गुरु-ग्यानी।प्रीति-प्रतीति राम-पद-पंकज सकल-सुमंगल-खानी ॥ ४ ॥अजहुँ जानि जिय, मानि हारि हिय, होइ पलक महँ नीको।सुमिरु सनेहसहित हित रामहिं, मानु मतो तुलसीको ॥ ५ ॥

अब कुछ और पढ़ें