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टूटे तागे निखुटी पानि

पद · लगभग २ मिनट
टूटे तागे निखुटी पानि। द्वार ऊपर झिलिकावहि कान॥कूच बिचारे फूए फाल। या मुंडिया सिर चढ़िबो कान॥इहु मुंडिया सगलो द्रव खोई। आवत जात ना कसर होई॥तुरी नारि की छोड़ि बाता। राम नाम वाका मन राता॥लरिकी लरिकन खैबो नाहि। मुंडिया अनुदिन धाये जाहि॥इक दुइ मंदर इक दुइ बाट। हमकौ साथरु उनको खाट॥मूंड पलोसि कमर बंधि पोथी। हमकौ चाबन उनकौ रोटी॥मुंडिया मुंडिया हुए एक। ए मुंडिया बूडत की टेक॥सुनि अधली लोई बेपीर। इस मुंडियन भजि सरन कबीर॥108॥

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