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हाशिया
कविता
लिखी रहीम लिलार में, भई आन की आन
रहीम
दोहा · लगभग २ मिनट
लिखी रहीम लिलार में, भई आन की आन।
पद कर काटि बनारसी, पहुँच्यो मगहर थान॥२३३॥
॥
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रूप रहीम बिलोकि तेहि, मन जहँ-जहँ लगि जाय
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वहै प्रीति नहिं रीति वह, नहीं पाछिलो हेत
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गई आगि उर लाय, आगि लैन आई जु तिय
रहीम
कविता
गई आगि उर लाय, आगि लैन आई जु तिय
रहीम
२ मिनट का पाठ
सीस नवाइ नबेलिया, निचवा जोइ
रहीम
कविता
सीस नवाइ नबेलिया, निचवा जोइ
रहीम
२ मिनट का पाठ
रहिमन नीर पखान, बूड़ै पै सीजै नहीं
रहीम
कविता
रहिमन नीर पखान, बूड़ै पै सीजै नहीं
रहीम
२ मिनट का पाठ