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माधव, हम परिनाम निरासा

पद · लगभग २ मिनट
माधव, हम परिनाम निरासा।तोहे जगतारन दीन दयाराम अतए तोहर बिसबासा॥आध जनम हम नींद गमाओल जरा सिसु कत दिन गेला।निधुबन रमनि-रभस रंग मातल तोहि भजब कोन बेला॥कत चतुरानन मरि मरि जाएत न तुअ आदि सवसाना।तोहि जनमि पुनु तोहि समाएत सागर लहरि अमाना॥भनइ विद्यापति सेष समन भय तुअ बिनु गति नहि आरा।तोहें अनाथक नाथ कहाओसि तारन भार तोहारा॥

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