के पतिआ लए जाएत रे मोराविद्यापतिकविताके पतिआ लए जाएत रे मोरा
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४२ रचनाएँ

के पतिआ लए जाएत रे मोराविद्यापतिकविता
पहिलें बदरि कुच पुन नवरंगविद्यापतिकविता
सुन-सुन सुंदर कन्हाईविद्यापतिकविता
कामिनि करए सनानेविद्यापतिकविता
पीन पयोधर दूबरि गताविद्यापतिकविता
सैसव जौवन दुहु मिलि गेलविद्यापतिकविता
कुच-जुग अंकुर उतपति भेलविद्यापतिकविता
कुंज भवन सएँ निकसलि रे रोकल गिरिधारीविद्यापतिकविता
वंशी माधुरीविद्यापतिकविता
पद-14विद्यापतिकविता
जहाँ-जहाँ पद-जुग धरईविद्यापतिकविता
रूप वर्णनविद्यापतिकविता
चंदा जनि उग आजुक रातिविद्यापतिकविता
सुंदरि तुअ मुख मंगल दाताविद्यापतिकविता
जय जय भैरव असुर-भयाउनिविद्यापतिकविता
सखि हे, कि पुछसि अनुभव मोएविद्यापतिकविता
जोगिया एक हम देखलौं गए माईविद्यापतिकविता
लोचन धाए फेधाएल हरि नहिं आएल रेविद्यापतिकविता
नाहि करब बर हर निरमोहियाविद्यापतिकविता
कि कहब है सखि आजुक विचारविद्यापतिकविता
अंकुर तपन ताप जदि जारबविद्यापतिकविता
चानन भेल विषम सर रेविद्यापतिकविता
जय-जय संकर जय त्रिपुरारिविद्यापतिकविता
माधव, हम परिनाम निरासाविद्यापतिकविता
ए हरि, बंदओं तुअ पद नाएविद्यापतिकविता
ससन-परस खसु अंबर रेविद्यापतिकविता
आगे माई एहन उमत बर लाइलविद्यापतिकविता
सखि हे मोर बड़ दैब बिरोधीविद्यापतिकविता
सिव हो उतरब पार कओन बिधिविद्यापतिकविता
भल हर भल हरि भल तुअ कलाविद्यापतिकविता
लोचन नीर तटिनि निरमानेविद्यापतिकविता
माधव हमर रतल दुर देसविद्यापतिकविता
चल देखए जाऊ ऋतु बसंतविद्यापतिकविता
हम नहिं आज रहब यहि आँगनविद्यापतिकविता
कखन हरब दुख मोर हे भोलानाथविद्यापतिकविता
हर जनि बिसरब मो ममिताविद्यापतिकविता